दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों ने अल्पावधि के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों
की घोषणा की है। सभी कोर्स ऑनलाइन 30 से 40 घंटे के होंगे। इन
डिप्लोमा कोर्स का लक्ष्य विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के लिए कार्य सक्षम
बनाना है। इनमें कुछ विदेशी भाषाओं से संबंधित कोर्स भी हैं। कुछ कॉलेजों ने
विदेशी संस्थानों से इसके लिए अनुबंध किया है। यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन
डिप्लोमा कोर्स को शासकीय नौकरियों में मान्यता मिलेगी या नहीं। यूजीसी की तरफ से
भी यह साफ नहीं हुआ है कि उन कोर्स को मान्यता दी गयी है या नहीं। पिछले कुछ दिन
से शिक्षा को लेकर यह संकेत मिलने लगे हैं कि शायद आगामी सत्र इस बार ऑनलाइन ही
चलाना पड़े। इस वर्ष नवंबर के बाद ही कॉलेज खुलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
ऐसे में विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन शार्ट टर्म कोर्स फायदेमंद हो सकते हैं। एक
बात का ध्यान रखना होगा कि यह कोर्स केवल एक प्रमाणपत्र बनकर न रह जाएं। यदि इनसे
विद्यार्थी वास्तव में कुछ सीख पाएंगे तभी इनका फायदा होगा। यूजीसी और सरकार के
स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट होनी आवश्यक है। कहीं ऐसा न हो कि बाद में यूजीसी और
सरकार दोनों इन कोर्स को अमान्य घोषित कर दे।
कोरोना संकट के कारण आने वाले समय में हमारा जीवन कैसा होगा कुछ कहा नहीं
जा सकता। बदलती स्थितियों के हिसाब से हमें अपनी शिक्षा पद्धति को बदलना ही होगा।
यह बदलाव ऑनलाइन शार्ट टर्म कोर्स के रूप में हो ही सकते है। साथ ही नियमित कोर्स में भी परिवर्तन करने
होंगे। विशेषरूप से स्कूली शिक्षा के संदर्भ में बदलाव आवश्यक हो गये हैं।
माध्यमिक स्तर तक के बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शायद उतनी आसान नहीं होगी। अभी तक
के जो अनुभव सामने आये हैं उनके अनुसार एक तो बच्चों के लिए कंप्यूटर या मोबाइल पर
लंबे समय तक पढ़ना संभव नहीं है। ऑनलाइन क्लास में बच्चे एकाग्रता नहीं रख पाते। शिक्षकों का भी बच्चों
पर नियंत्रण नहीं रहता। अभिभावकों को भी बच्चों के साथ बैठना पड़ता है जो एक बड़ी
समस्या होगी। इसके अलावा बच्चों को दिया जाने वाला होमवर्क व प्रोजेक्ट एक बड़ी
समस्या होंगे कि उनका मूल्यांकन कैसे किया जाएगा। अभी हमारे पास समय है कि इन
समस्याओं पर विचार किया जाए और कोई हल निकाला जाए। कोरोना ने जीवन को बदल दिया है
तो हमें शिक्षा व्यवस्था को भी बदलना होगा।

सर बहुत ही सटीक विश्लेषण।
ReplyDeleteधन्यवाद। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
Deleteसही बात,, समसामयिक लेख
ReplyDeleteधन्यवाद। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
Deleteइसका समाधान निकालना ही होगा
ReplyDeleteधन्यवाद। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
Deleteप्रकृति ने ही बदलाव किया है अब हर जगह कुछ ना कुछ बदलाव लाना ही होगा जिस से प्रकृति के साथ कुछ मिलाप हो सके।
ReplyDeleteधन्यवाद। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
Deleteउम्दा है कोरोना की सामयिक व्याख्या
ReplyDeleteकोरोना के आने से इन्टरनेट सुविधाएं भी बढ़ गईं हैं और साथ ही इसका प्रयोग भी अत्याधिक बढ़ गया है । लगता है मोदी जी का digital India का सपना कोरोना ही पूरा करेगा ।😂😂
ReplyDeleteधन्यवाद। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
DeleteNicely articulated sir
ReplyDeleteधन्यवाद जय जी। यदि उचित समझें तो इसके वेब वर्जन पर जाकर फ़ॉलोअर्स के रूप में खुद को दर्ज कराएं।
Deleteसही बात है सर कुछ तो करना ही होगा
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