Thursday, July 9, 2020

शिक्षा : क्या हम इसके लिए तैयार हैं?


वेद प्रकाश भारद्वाज

कोविड 19 के कारण विश्व समाज के सामने जो नए चैलेंज आए हैं उनमें से शायद सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में होगा। यह हमारे जीवन से सीधे और तात्कालिक रूप से जुड़ा है। परन्तु इस तात्कालिकता से थोड़ा हट कर देखें तो एक और बड़ा, बल्कि अधिक गम्भीर चैलेंज शिक्षा का होगा जो हमारा भविष्य तय करेगी।


लॉकडाउन के समय शिक्षण संस्थान जो बंद हुए हैं फिलहाल जल्दी उनके खुलने की संभावना दिखाई नहीं देती। यदि कोविड का प्रकोप अगले कुछ माह और जारी रहा तो जाहिर है कि इसका सबसे अधिक असर उस शिक्षा पर होगा जो वर्तमान को बनाने के साथ ही भविष्य का निर्माण भी करती है। इस भविष्य निर्माता का अपना भविष्य क्या होगा और कैसा होगा, यह आज बड़ा सवाल है।

लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत पूरी दुनिया में हुई। भारत में भी। परन्तु भारत और दुनिया के दूसरे देशों में एक बड़ा अंतर संसाधनों के स्तर पर है। भारत सहित तमाम एशियाई देशों में इंटरनेट सेवाओं का स्तर व उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। दूसरे छोटे बच्चों के साथ अलग तरह की समस्या है। इसके बाद भी यह माना जा रहा है कि शिक्षा का भविष्य या भविष्य की शिक्षा अब ऑनलाइन ही हो सकती है।

दुनिया के कई देशों में यह पहले से अपनाई जा चुकी है। भारत में केवल गिनती के संस्थान हैं जिन्हें ऑनलाइन या कहें ऑफ कैम्पस शिक्षा देने की अनुमति है। अब यदि ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल कॉलेजों को अनुमति दी भी जाती है तो वह ऐसा सफलता से कर पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है। दिल्ली विश्वविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षाओं को लेकर हुआ विरोध और मॉक टेस्ट के समय सामने आई तकनीकी समस्याओं के कारण परीक्षाओं का रद्द होना इसका प्रमाण है। इसीलिए आज यह सवाल करना पड़ रहा है कि क्या हम भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए तैयार हैं?

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